मै और तुम
मिले जब
समय के किसी
पड़ाव पर बेसाख़्ता
तो यूँ लगा!
जैसे वक़्त का एक-एक
सिरा थामे हुए
बढ़ रहे थे हम दोनों
एक दूजे की ओर
और बीच में अचानक
मुलाक़ात हो गयी।
मिले जब
समय के किसी
पड़ाव पर बेसाख़्ता
तो यूँ लगा!
जैसे वक़्त का एक-एक
सिरा थामे हुए
बढ़ रहे थे हम दोनों
एक दूजे की ओर
और बीच में अचानक
मुलाक़ात हो गयी।
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